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एक 'बेटी' ने ही सारा जहां सर पे.........?

Posted On: 4 Oct, 2013 social issues में

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एक ‘बेटी’ ने ही सारा जहां सर पे………?

shrab.jpegबात इसी महीने के प्रारम्भ की है, मैं सुबह लगभग 10 बजे निकटवर्ती कस्बे में सिथत अपने विधालय, स्कूटर से जा रहा था। आधा रास्ता तय हो चुका था। तभी मैंने दूर से देखा 3-4 बाइक सड़क के किनारे खड़ी हैं और सड़क के किनारे कुछ लोग जमा हैं। मैं भी जिज्ञासावश रूक गया और उन लोगों से पूछा-भाई क्या हुआ?
उनमे से एक बोला एक्सीडेन्ट हो गया है, मैंने अपना स्कूटर भी साइड लगाया, उनके पास जाकर देखा कि एक वृद्ध जमीन पर बेहोश पड़ा है, उसके सिर से खून बह रहा था। हमने फौरन उस वृद्ध को उठाया और सड़क की दूसरी साइड में छायादार पेड़ के नीचे लिटा दिया।

हम उस साइड वापस आये, तो तभी सड़क के किनारे बने गडडे से एक युवक बाहर आया, उसके भी सिर से खून बह रहा था और वह बुरी तरह घबराया हुआ था। हमने उसे सम्भाला और पूछा कि एक्सीडेन्ट किस चीज से हुआ है, और तुम किस वाहन पर सवार थे? वो बोला मैं और मेरा दोस्त बाईक पर थे और ये बुडडा (शहर की भाषा में वृद्ध) साइकिल पर था। मैंने उससे पूछा तुम्हारा दोस्त कहां हैं? उसने सडक के किनारे बने गडडे की और इशारा कर दिया और अपना सिर पकड़ कर जमीन पर लेट गया।
हम तेजी से गडडे की तरफ भागे तो देखा, एक बाइक झाडियों में पड़ी है, हमने फटाफट उस बाइक को उठाया, उसके नीचे उसका दोस्त दबा हुआ था। उसे भी निकाला. उसके नीचे साइकिल थी, साइकिल का अगला पहिया लडडू की तरह पिचक गया था। मेरे ”पत्रकार” दिमाग ने “टूव्हीलर्स” की “दशा और दिशा” देखकर मन ही मन हिसाब लगाना शुरू कर दिया-”बाइक सवार ‘मेरठ’ की तरफ जा रहे थे अत: वे अपनी साइड में चल रहे थे, साइकिल पर सामने से टक्कर लगी है, क्योंकि उसका अगला पहिया मुड़ा हुआ है। इसका मतलब है कि साइकिल सवार रौंग साइड में चल रहा था।”
हमने नीचे दबे हुए लड़के को उठाया, उसकी उम्र 16-17 साल की होगी। उसके भी सिर से खून बह रहा था, वो बार-बार घबराहट या दर्द के कारण बेहोश हो रहा था। हम दो व्यक्तियों ने उसे सहारा दिया, मैंने उसे संतावना देने की कोशिश करते हुए कहा-‘बेटा पहली गलती ये तुम्हारे सिर पर हेलमेट नहीं है, जबकि टूव्हीलर पर 90 प्रतिशत मौंते सिर पर चोट लगने के कारण होती हैं, या तो उनके सिर पर अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा हो, या रक्त बिल्कुल न निकल रहा हो, क्योंकि रक्त न निकलने से ब्रेनहेमरेज का खतरा रहता है, और घायल को 30 मिनट में एक अच्छे हॉस्पिटल में पहुंचाना जरूरी होता है, तुम सैफ हो क्योकि तुम्हारे सिर से खून तो निकल रहा है पर चोट गम्भीर नहीं है, इसलिए तुम घबराओ नहीं, ये मैं नहीं कह रहा मेरा तजुर्बा कह रहा है, क्योकि स्कूटर से मेरे छोटे-बड़े कुल मिलाकर 5 एक्सीडेन्ट हो चुके हैं।” उसे समझाते-समझाते हम उसे भी सड़क की दूसरी साइड़ ले गये, और वही लिटा दिया।
हमने प्रयास करके एक छोटी गाड़ी को रूकवा लिया, जो उनको हॉस्पिटल ले जाने को तैयार हो गया। हमने कहा सबसे पहले उस वृद्ध को गाड़ी में बैठाओ कही वो मर ना जाये । हम तुरन्त उस वृद्ध की तरफ बढ़े, पाठकजन पढ़कर हैरान होंगे कि वो वृद्ध उठकर बैठा हुआ था और उसके हाथ में शराब का पव्वा (क्वार्टर) था, जिसे वह अपने कंपकपाते हाथों व झुलते हुए शरीर से खोलने की कोशिश कर रहा था।
सभी को उस वृद्ध पर तेज गुस्सा आया, मैंने उसके हाथ से पव्वा छिनकर फैंक दिया, उसके पास जाने पर उसके मुंह से शराब की तेज स्मैल आयी, हमने कहा! तेरी वजह से इन लडकों को इतनी चोट लगी है और तेरे पैर भी कब्र में लटक रहें हैं, इतना नशे मे होने के बाद भी तू और पीने की कोशिश कर रहा है? तभी मुझे काफी दिन पहले सुनी एक कविता याद आ गयी, सही लय याद नहीं है किसी पाठकबन्धु को पता हो तो अवश्य शेयर करें-
शराब के ठेके के सामने से गुजरा ‘जनाजा’
मुरदा उठ बैठा
बोला, दोस्तों 4-5 बोतलें ले लो
कब्र में बैठ कर पिया करेंगे
‘खुदा’ जो मांगेगा कर्मो का हिसाब
उसे भी एक-दो पैक दे दिया करेगें।
मेरी कविता सुनकर सभी खिलखिलाकर हंस पड़े, हमने उस वृद्ध और दोनों लड़को को गाड़ी में लिटा दिया, गाड़ी आगे बढ़ गयी।
मैं भी अपने स्कूटर के पास आया और चाबी लगाई और किक मारने ही जा रहा था, कि एक शायर साहब का एक शेर याद आ गया। “शराब” का एक नाम ”अंगूर की बेटी” भी है, शायद इसलिए क्योकि ये अंगूर से भी बनाई जाती है, शायर ने लिखा है-
एक ‘बेटी’ ने ही सारा जहां
सर पे उठा रखा है,
शुक्र है ‘अल्लाह’! का अंगूर के ‘बेटा’ ना हुआ!
और मैंने भी अपने स्कूटर को किक मारी और गंतव्य की ओर रवाना हो गया।

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346 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
October 10, 2013

इस अंगूर की बेटी ने ही दुनिया को बर्बाद किया है पर इसके मोह में ही जकड़ें हैं

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 10, 2013

    निशा जी, सदर नमन! ब्लॉग पर पहली बार आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

jlsingh के द्वारा
October 10, 2013

एक बेटी ने उठा रक्खी है सर पे दुनिया …ये तो अच्छा हुआ, अंगूर को बेटा न हुआ! जब से सरकार ने नशा बंदी तोड़ दी, मानो या न मानो हमने पीनी छोड़ दी! वो भी दिन क्या थे ब्लैक में मंगाते थे, सब्जी की टोकड़ी में बोतल छिपाते थे. मयखाने खुल गये नशे सारे धुल गए, ….. ऐसा ही एक गाना था, अपने समय में बड़ा लोकप्रिय हुआ था. दुर्घटना के रोचक प्रस्तुति के लिए आपका हार्दिक अभिनन्दन …सार्थक सन्देश भी छोड़ा है आपने … इसे मैं फेसबुक पर शेयर कर रहा हूँ! सादर !

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 10, 2013

    सिंह साहब, सदर नमन! एक सुन्दर कविता से परिचित कराने के लिए, और ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक धन्यवाद! फेश बुक पर शेयर करने के लिए दुबारा धन्यवाद, सिंह साहब!

    Boss के द्वारा
    July 11, 2016

    This is a most useful cobriinutton to the debate

sonam saini के द्वारा
October 9, 2013

नमस्कार सर ……………………शराब के दोष जानने के बाद भी लोग शराब पीना नही छोड़ते ………. अच्छा आलेख सर जी …….. बधाई

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 9, 2013

    सोनम जी, सादर नमन! ब्लॉग पर पहली बार आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

yatindranathchaturvedi के द्वारा
October 7, 2013

सही कहा, सादर

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 8, 2013

    चतुर्वेदी जी, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
October 4, 2013

SATEEK V SARTHAK POST .AABHAR

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 7, 2013

    आदरणीया शिखा जी, सादर नमन! कमेंट्स करने व् ब्लोक पर आने के लिए धन्यवाद!

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 7, 2013

    संतलाल जी, सादर नमन! ब्लॉग पर सबसे पहले व् पहली बार आने पर हार्दिक धन्यवाद!

Santlal Karun के द्वारा
October 4, 2013

घटना का रोचक जिक्र, मार्मिक और संदेशपरक: हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 7, 2013

    आदरणीय संतलाल जी, सादर नमन! कमेंट्स करने व् ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद!

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 7, 2013

    शिखा जी, सादर नमन! ब्लॉग पर सबसे पहले आने, के लिए हार्दिक धन्यवाद!

    Keyla के द्वारा
    July 11, 2016

    Well-loved. Most pubaicltions have talked of Aamir being the Indian actor to be featured on the cover of TIME after Parveen Babi and Aishwarya Rai., and not the first. IN any case just being featured on the cover is no big deal as it is the Asian edition of TIME and it is like being featured on the cover of say India Today. But what is to be noted is that unlike the previous occasions, when the story was about Asian Cinema in general, this time the cover story is on Aamir. and even more than that what is important is the STORY itself.


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