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धरती की गोद

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जब 'मुर्दा' बोला? एक बीड़ी म्हारी भी़......!

Posted On: 31 Oct, 2013 Others में

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यह सत्य घटना 70-80 के दशक की होगी, मैंने इस घटना को अक्सर पुलिस वालों से सुना है। मैं इसे केवल कहानी का रूप दे रहा हूँ।
राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर टू-व्हीलर सवार दुर्घटना में मारा गया, किसी बड़े वाहन ने उसे कुचल दिया था। सर्दियों के दिन थे शाम को दुर्घटना हुई थी। उसका क्षत-विक्षत शव को एक चादर से ढक कर सड़क के किनारे एक खेत में रख दिया गया। शव का पंचनामा भरा जाना शेष था, इसलिए शव को पोस्टमार्टम के लिए न भेजा जा सका। सिपाई खाना खाने के लिए चौकी में चले गये, जो दुर्घटना स्थल से थोड़ी ही दूरी पर थी।
खाना खाने के बाद तीनों सिपाई रात में वापस लौटे, अंधेरा हो गया था, केवल सड़क पर चलने वाले वाहनों का प्रकाश था। वे अंधेरे में ही शव के नजदीक एक पुलिया पर बैठ गये। एक ने बीड़ी निकाली और जलाने लगा।
दूसरा बोला-एक बीड़ी मेरी भी लगा लेना!
तभी आवाज आयी- भाई! एक बीड़ी म्हारी भी लगाय दो!
तीनों ने एक दूसरे के मुंह को देखा, मानों एक दूसरे से पूछ रहे हों कि कौंन बोला? क्योकि तीसरा सिपाई बीड़ी नहीं पीता था।
तभी उन्होने देखा कि मुर्दे ने अपना हाथ ऊपर कर रखा है, और वह फिर बोला- भाई! एक बीड़ी म्हारी भी लगा दो!
पाठकगण! अन्दाजा लगाये, यदि ऐसी परिस्थिति आप के साथ होती जो आप क्या करते?
अधिकतर का जवाब होगा- हम वहां से भाग लेते!
वहीं हुआ तीनों सिपाई डर व खोफ से, वहां से बेतहाशा भागे। सड़क पर चलते वाहनों का भी ध्यान नहीं दिया। एक सिपाई सामने आते वाहन से टकरा गया, बचे दो सिपाईयों ने पीछे मुडकर भी नहीं देखा, सीधे चौकी में जाकर ही होश लिया। उन दो में से एक सिपाई का हार्टफेल हो गया, वो चौकी में ही गिर गया। तीसरे बचे सिपाई ने सारी घटना, चौकी इंचार्ज को बतायी।
चौकी इंचार्ज एक नवयुवक था, उसने फौरन अपनी गन लगाई और एक सिपाई को लेकर घटना स्थल की तरफ दौड़ा।
रास्ते में पहले सिपाई का किसी वाहन से कुचला शव मिला, उसे उन्होने खींचकर सड़क के किनारे किया। सिपाई डर के कारण पीछे ही रहा, धीरे से बोला-सर! इन भूत-बलाओं से दूर रहो तो अच्छा है, रात में वहां जाना ठीक नहीं है, हम सुबह आकर देखते हैं?
चौकी इंचार्ज ने उसे जोर से डांटा-चुप रहो, एक सिपाई हार्टफेल से मर गया, एक दुर्घटना से मर गया, मेरे दो सिपाई मर गये हैं! मैं उस भूत को देखना चाहता हूँ! तुम्हे डर लग रहा है, तो तुम वापस जा सकते हो। सिपाई कुछ नहीं बोला, डरता हुआ धीरे-धीरे उसके पीछे अपनी रायफल सम्भाले चलता रहा।
दुर्घटना स्थल पर पहुंच कर, उन्होने खेत की तरफ टार्च मारी, तो वहां का दृश्य देखकर, एक बारगी चौकी इंचार्ज भी घबरा गया, देखा मुर्दा लेटा हुआ बीड़ी पी रहा है।
सिपाई तो इस दृश्य को देखकर उल्टा भाग गया।
चौकी इंचार्ज ने अपने डर व घबराहट पर काबू करके अपनी गन उस पर तानते हुए, आवाज लगायी-तुम कौन हो खड़े हो जाओ, नहीं तो गोली मार दूंगा?
मुर्दे से कोई आवाज नहीं आयी!
चौकी इंचार्ज ने अपनी घबराहट को काबू करने के लिए फौरन दो हवाई फायर कर दिये, फायर की आवाज सुनते ही मुरदा उठ कर भाग लिया, इंचार्ज फौरन समझ गया ये मुरदा नहीं हो सकता!
वो उसके पीछे भागा और उसे पकड़ लिया। फायर की आवाज सुनकर, भागा हुआ सिपाई भी वापस आ गया।
टार्च जलाकर उस का चेहरा देखा, पता चला ये तो हमारे कस्बे का ही एक ”पागल” है जो दिन-भर इधर-उधर घूमता रहता है। दोनों ने तबियत से उसकी “खातिरदारी” की, और टार्च की रोशनी से वास्तविक शव को तलाशने लगे, दुर्घटना वाला शव गडडे में पड़ा मिला।
“कडि़यों को जोड़ा गया, तो ये बात सामने आयी, कि जिस समय पुलिस वाले खाना खाने गये हुए थे, ये पागल घूमता हुआ यहां आ गया होगा, चूंकि सर्दी पड रही थी, तो इस पागल ने शव पर चादर ढकी देखी होगी और शव को गडडे में ढकेल कर, खुद उसी चादर को ओढ कर लेट गया होगा! आगे कि घटना में पूर्व में बता चुका हूं।
एक ”पागल” के ”पागलपन” से दो पुलिस वालों को अपनी जान से हाथ धौना पड़ा। यदि वे थोड़ा सा दिमाग से सोचते कि एक क्षत-विक्षत शव कैसे बोल सकता है या हिलडुल सकता है। शायद वे मरने से बच जाते।
मेरा मानना है, यदि ‘शव’ क्षत-विक्षत नहीं है तो वह कुछ परिस्थितियों में आवाजें कर सकता है तथा हिलडुल भी सकता है। मैंने खुद देखा है! उसका वर्णन मैं किसी अन्य ब्लाग में करूंगा!
अन्त में तीनों ”मृतकों” को श्रद्वांजलि देते हुए ”महरूम” साहब की एक ”रूबाई” के साथ ब्लॉग समाप्त करता हूँ-
तिनका है  बशर-मौजे फना के  आगे
चलती नहीं कुछ उसकी कजा के आगे
क्या  चीज है मौत, आ बताऊं मुझको
इन्सान  की शिकस्त है खुदा के आगे।

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Jaylan के द्वारा
July 11, 2016

hi all.. i have a question that not related to this subject.. i saw someone onlocked / awarded the “Social Bue8trfly&#t221; badge, i’m wondering how to unlocked that badge? i already post my check-in to my twitter and facebook account but i still can earn the badge?could enyone give me a clue to unlock it?i’ve already ask the same question to miso twitter account but i haven’t got any answer yet..

sadguruji के द्वारा
October 31, 2013

आदरणीय संजय कुमार गर्ग जी,हमारा समाज जीवित लोगों से ज्यादा मृत लोगों से डरता है.ये आज के वैज्ञानिक युग में भी एक सच्चाई है.सबसे ज्यादा दुःख काल्पनिक भूत के भय से दो सिपाहियों के डरकर मरने से हुआ.महरूम साहब कि रुबाई का कोई जबाब नहीं- क्या चीज है मौत, आ बताऊं मुझको इन्सान की शिकस्त है खुदा के आगे.आप के अन्य लेख पढ़े,अच्छे और ज्ञानवर्धक लगे.बधाई.

    sanjay kumar garg के द्वारा
    October 31, 2013

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक धन्यवाद व् आभार !

    Keyaan के द्वारा
    July 11, 2016

    Articles like this really grease the shafts of kngoeldwe.


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