social issu

धरती की गोद

30 Posts

20366 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5503 postid : 643545

''बाबर'' की रगों में ''हिन्दू'' का खून है!

Posted On: 11 Nov, 2013 Others,social issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend


blood6.jpegघटना कुछ दिन पहले की है। मैं अपने शहर के ही एक बड़े हॉस्पिटल में अपने बेटे की मेडिकल रिपोर्ट लेने गया था। रिपोर्ट लेने के बाद मैं वापस आ ही रहा था कि मैंने देखा कि हॉस्पिटल के ‘ब्लड बैंक’ के पास से काफी जोर-जोर से रोने की आवाजें आ रही हैं। मैं जिज्ञासा वश उस तरफ बढ़ा। देखा कि एक मुस्लिम महिला जोर-जोर से रो रही थी, उसके साथ खड़े युवकों की आंखें भी नम थी। वे महिला को सम्भालने की कोशिश कर रहे थे।
मैंने आगे बढ़ कर एक युवक से पूछा! तो पता चला कि उस युवक का भार्इ एक्सीडेन्ट में गंभीर रूप से घायल हो गया है और उसे तत्काल ब्लड की आवश्यकता है जबकि ‘ब्लड बैंक’ में उस ग्रुप का ब्लड ही नहीं है।
मैंने कहा कि आप का ब्लड तो आपके भार्इ के ब्लड से मैच करता होगा, आप अपना ब्लड क्यों नहीं दे देते?
उसने कहा अभी 10 दिन पहले, हम तीनों भाइयों ने अपनी बहन को ब्लड दिया था, जो कि ‘किडनी डेमेज’ होने के कारण चल बसी थी। इसी कारण डाक्टर ने हम भाइयों का ब्लड लेने से मना कर दिया है।

blood मैंने उससे, उसके जख्मी भार्इ का ‘ब्लड ग्रुप’ पूछा, जो मेरे ‘ब्लड ग्रुप’ से मैच कर रहा था!
मैंने उससे कहा-मेरा भी यही ‘ब्लड ग्रुप‘ है और मैं ‘ब्लड डोनेट’ के लिए तैयार हूँ! मेरी बात सुनकर उन सब के चेहरे खिल गये, मां के मुंह से आशीषे व भार्इयों के चेहरों पर कृतज्ञता के भाव थे।
”मैं” स्वयं और मेरी ”बुद्धि” अपने इस निर्णय पर हतप्रभ थी। जबकि मैं ”याचक” को भी बिना आयु, पात्रता, शारीरिक स्थिति आदि देखे बिना, एक ‘सिक्का’ भी नहीं देता था। यहां में अनाम-अनजान युवक को अपने शरीर की ”जीवन रक्षक रक्त” जैसी चीज देने के लिए फौरन तैयार हो गया था, जबकि मेरा बेटा व बेटी दोनों घर पर बीमार थे।

पाठकजनों!! मैंने महसूस किया कि मेरा ये निर्णय ‘मौलिक’ नहीं था, बल्कि ‘र्इश्वरीय’ आदेश था। जो उस ‘खुदा’ के ‘बन्दे’ की मदद करने के लिए मुझे प्रेरित कर रहा था, इसका तात्पर्य था कि ‘र्इश्वर-अल्लाह’ में या तो अच्छी ‘दोस्ती’ है या फिर ये एक ही ”सर्वशक्तिमान सत्ता” के दो नाम हैं!
मैंने अपने बाजू के बटन खोलकर जैसे ही ऊपर किये, मेरे हाथ में बंधा मोटा ”कलावा” देखकर उन भार्इयों का चेहरा उतर गया। मैंने उनके चेहरे के भाव पढ़ते हुए उनसे पूछा क्या हुआ भार्इ?
उनमें से एक भार्इ बोला-भार्इ जान! क्या आप हिन्दू हैं?
बिल्कुल! मैं शुद्ध शाकाहारी हिन्दू हूँ-मैंने कहा!
”किसी ‘मुफ्ती’ ने कोर्इ ‘फतवा’ तो जारी नहीं किया है, कि किसी ‘हिन्दू’ का रक्त ‘मुस्लिम’ के लिए हराम है?” क्योकि ऐसी कोर्इ जानकारी मुझे नहीं है। मैंने नर्स को ब्लड लेने से रोकते हुए कहा!
नहीं भार्इ जान! शायद आपको नहीं मालूम कि हम ‘मुस्लिम’ हैं-उसने सकुचाते हुए कहा!
अरे भार्इ! आप ‘इन्सान’ हो ना! मैं इन्सान को रक्त दे रहा हूं किसी जाति-धर्म को नहीं। मैं तो एक बार एक जानवर (कुतिया) को बचाने के लिए गहरे कुएं में रस्सी के सहारे उतर कर उसे निकाल लाया था। आप तो इन्सान हैं।
भार्इ जान! हमें आपका खून लेने में कोर्इ दिक्कत नहीं है, हमने तो सोचा था, शायद आपको नहीं पता हम मुस्लिम हैं-उसका भार्इ बोला!
नर्स ने ‘क्रास चेक’ करने के लिए मेरा ब्लड ले लिया और मैं अपने बेटे की रिपोर्ट दिखाने डाक्टर के चैम्बर की तरफ चला गया।
मेरे बेटे की ‘रिपोर्ट’ व मेरे ब्लड की ‘क्रास रिपोर्ट’ दोनों नार्मल थी, मेरे चेहरे पर सुकून के भाव थे और मैं उन तीनों के भार्इ, (जिसका नाम ”बाबर” था) को ब्लड देने के लिए ‘ब्लड बैंक’ की तरफ बढ़ गया।
bloodपाठकजनों! रक्त-रहमत है खुदा की! सैकड़ों व्यक्ति दुर्घटना इत्यादि में रक्त के अभाव में मर जाते हैं। हम किसी का ‘रक्त देकर’ किसी की जान बचा सकते हैं, और किसी का ‘रक्त बहाकर’ किसी की जान ले भी सकते हैं। निर्णय हमारे हाथों में है। आओ!! हम जात-पात-ऊंच-नीच-धर्म का भेद मिटाकर रक्तदान करें! अपने क्षेत्र में, मैं शुरूआत कर चूंका हूँ, आपके क्षेत्रों में भी, मैं ऐसी ही पहल की उम्मीद करता हूँ। ताकि जैसे मैं गर्व से कह रहा हूं कि ”बाबर की रगों में हिन्दू का खून दौड़ रहा है” वैसे गर्व से मुस्लिम भार्इ भी कह सकें कि ”एक हिन्दू की रगों में मुस्लिम का खून दौड़ रहा है” अंत में ‘चार लाइनों’ के साथ ब्लॉग समाप्त करता हूँ-
एक  दीया  ऐसा ‘मौहब्बत’ का  जलाया जाये,
जिसका  पडो़सी के घर तक भी उजाला  जाये,

इससे बढ़कर ना कोर्इ ‘पूजा’ ना ‘इबादत’ होगी
कि  किसी  रोते हुए ‘इन्सां’ को  हंसाया जाये।

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 4.20 out of 5)
Loading ... Loading ...

1194 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Opticals Malda के द्वारा
May 20, 2017

Fantastic overcom! I have to newbie while doing so while you fix your website, how . Opticals Maldamight i sign up to for your weblog web-site? The bill aided me a appropriate bargain. I personally were being a bit more common of the your over the air furnished vibrant see-thorugh concept

ahsanullah के द्वारा
September 25, 2014

आप ने बहुत अच्छा लिखा है 

    sanjay kumar garg के द्वारा
    September 26, 2014

    comments ke liye dhanyvaad! Ahsaullah Ji

    Bardo के द्वारा
    July 11, 2016

    An answer from an expert! Thanks for cortnibuting.

    Sable के द्वारा
    July 11, 2016

    Apeicpiatron for this information is over 9000-thank you!

    Etty के द्वारा
    July 11, 2016

    It’s about time sooneme wrote about this.

sinsera के द्वारा
November 25, 2013

संजय कुमार जी , आपके नेक विचारों से सहमत हूँ और रक्तदान कर भी चुकी हौं..थोडा आगे जाते हुए मैं मृत्योपरांत देह-दान भी करने का इरादा रखती हूँ, जिसके लिए अभी मुझे परिवार की सहमति प्राप्त नहीं हो पा रही है लेकिन मुझे उम्मीद है कि मैं अपने जीते जी घर वालों को मना लूँगी…अपने एक पुराने ब्लॉग का लिंक शेयर कर रही हूँ, यदि समय हो तो पढियेगा….http://sinsera.jagranjunction.com/2012/06/12/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97-%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%B9%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A5%82-%E0%A4%B8%E0%A5%87/

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 25, 2013

    आदरणीय सिनसेरा जी, सादर नमन! कमेंट्स करके मेरा उत्साह बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद! मैं आपके ब्लॉग को अवश्य पढूंगा! धन्यवाद!

    Linda के द्वारा
    July 11, 2016

    I don’t do well with a camera, but I see the correlation here and it works for sure. You see something from another place, another point of view and all of a sudden it’s more interesting and maT.galichis was a fantastic piece !!!!

sadguruji के द्वारा
November 20, 2013

आदरणीय संजय कुमार गर्ग जी,आप का लेख सौ % इस योग्य है.मैंने पूरी तरह से निष्पक्ष होकर चयन किया है.आप को बधाई.प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आप अपनी पसंद के १० लेखकों को चुन लीजिये.प्रत्येक लेख के बारे में अपने कुछ विचार व्यक्त करने के साथ लिंक जोड़ दीजिये.लिंक जोड़ने के लिए लेख के नीचे दायीं तरफ tell & share में जाकर gmail दबाकर लिंक ले लीजिये.अपने सादर प्रेम व् शुभकामनाओ सहित.

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 20, 2013

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन! जैसा आप जानते मैं इस मंच पर नया हूँ, सभी ब्लॉगर को मैंने ठीक से पढ़ा भी नहीं है, क्या इस तरह से मेरा इस प्रतियोगिता में भाग लेना उचित होगा? प्लीज मार्गदर्शन दीजिये, धन्यवाद!

seemakanwal के द्वारा
November 18, 2013

घर से मस्जिद है बहुत दूर ,चलो यूँ कर लें किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाये .. आभार

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 18, 2013

    सीमा जी, सादर नमन! बहुत अच्छा ‘शेर’ लिखा है, ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक आभार! सीमा जी! किर्पया ब्लॉग पर आते रहिये और मेरा उत्साह बढ़ाते रहिये! धन्यवाद!

    Kayo के द्वारा
    July 11, 2016

    The voice of rattinalioy! Good to hear from you.

sadguruji के द्वारा
November 16, 2013

आदरणीय संजय कुमार गर्ग जी,बहुत दिनों बाद इतना शिक्षाप्रद और उपयोगी लेख पढ़ने को मिला है.जागरण जंक्शन मंच को आप के रूप में एक हीरा मिला है.बहुत-बहुत बधाई और अपनी समस्त शुभकामनाओं सहित.

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 16, 2013

    सद्गुरु जी, सादर नमन! मैं आपके बेशकीमती कमेंट्स का इन्तजार कर रहा था, आपने ब्लॉग पर आकर व् मुझे कमेंट्स देकर धन्य कर दिया है, धन्यवाद! सद्गुरु जी!

    Storm के द्वारा
    July 11, 2016

    Action requires knoeewdgl, and now I can act!

shailesh001 के द्वारा
November 13, 2013

कई दृिष्टयों से महत्वपूर्ण व प्रशंसनीय आलेख है आपका 

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 13, 2013

    शैलेश जी, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!

ranjanagupta के द्वारा
November 12, 2013

भाई संजय जी !ये सारी बाते यदि हमारे देश के नेताओ को भी समझ आजाती तो कितना अच्छा था ,वोट बैंक के लिए दोनों को लड़वाया जाता है ,दंगे कराये जाते है ,वे भूल जाते है कि नफरत से जिस इंसानियत का वे खून कर रहे है ,उनका तो लहू भी एकही रंग का है ! किसलिए एक भाई दू सरे भाई का क़त्ल कर देता है ?

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 12, 2013

    रंजना बहन, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व् इतना सुन्दर कमेंट्स करके आप ने अपने भाई को अनुगृहीत कर दिया है, प्लीज ब्लॉग पर आते रहिये अपने भाई का मार्गदर्शन करते रहिये! धन्यवाद रंजना बहन!

Imam Hussain Quadri के द्वारा
November 12, 2013

आज इसी धर्म अधिकारी कि ज़रुरत है और सच्चाई यही है के हमारा देश भारत इसी वजह से महान है के ये सभ्यता और इंसानियत कि मिसाल दुनिया के किसी देश में नहीं मिलती . ज़रूर हैम होंगे आपके साथ .

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 12, 2013

    कादिर साहब, सादर नमन! यही तो शरूआत में करना चाहता, हम हिन्दू-मुश्लिम कि बात भुला कर रक्त-दान करें! आप मेरे साथ है, यह पढ़कर अच्छा लगा! परन्तु लगता है “जागरण-जंक्शन” पर मेरे विचारों वाले ब्लोगर नहीं हैं. तभी तो केवल अभी तक २ कमेंट्स आये है, आप का सहयोग आगे भी बना रहेगा. इस उम्मीद के साथ कादिर भाई आपका शुक्रिया !

    Eagle के द्वारा
    July 11, 2016

    Very nice post. I just stumbled upon your blog and wished to say that I’ve really enjoyed browsing your blog posts. In any case I’ll be suiscribbng to your rss feed and I hope you write again soon!

jlsingh के द्वारा
November 11, 2013

आदरणीय श्री संजय गर्ग जी, आपका हार्दिक अभिनन्दन! एक आपके पुण्य कार्य के लिए और दूसरा इस पुण्य कार्य को इस मंच पर साझा करने के लिए! कहीं न कहीं शुरुआत तो हैम सबको करनी ही होगी भाईचारा बढ़ाने के लिए न कि दूरी बढ़ाने के लिए! आपका पुन: वंदन!

    sanjay kumar garg के द्वारा
    November 12, 2013

    जेएल साहब, सादर नमन! मुझे अपने “अनुभव शेयर” करने आदत है! इस ब्लॉग को लिखने का भी मेरा यही मकसद था! हम हिन्दू-मुश्लिम की बात को भुला कर रक्त-दान करें. ब्लॉग पर आने व सुन्दर कॉमेंट्स करने के लिये हार्दिक धन्यवाद! जेएल साहब

    Capatin के द्वारा
    July 11, 2016

    Ya learn soheimtng new everyday. It’s true I guess!

    Heidi के द्वारा
    July 11, 2016

    Jeg har et sønbeskarn som bor i Hong Kong. Hans kones foreldre bor i Tokyo, men de har det bare bra alle sammen. Ikke sett noe mye til han på facebook, men nettet er jo nede.


topic of the week



latest from jagran