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धरती की गोद

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देखा देखी साधै जोग, छीजै काया बाढ़ै रोग।

Posted On: 26 Dec, 2013 Others,लोकल टिकेट में

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yoga3‘योग’ जब तक ‘योग’ रहा, हम भारतीयों ने उसके महत्व को नहीं समझा। लेकिन जैसे ही यह विदेशी कन्धों पर चढ़कर ‘योगा’ बनकर भारत में आया। हमने उसका खुलेदिल से स्वागत किया। क्योकि हमें अपने प्राचीन ऋषि-मुनियों के शोध से ज्यादा विदेशी शोध पर विश्वास है। योगगुरू बाबा रामदेव ने योग का ‘वैश्वीकरण’ कर उसे विश्व भर में फैलाया, परन्तु साथ ही उसका ‘व्यवसायीकरण’ भी कर दिया। इसे मैं गलत नहीं मानता क्योकि हम भारतीयों को फ्री का ज्ञान समझ नहीं आता, केवल वो ही ज्ञान समझ आता है जिसमें गांठ से पैसा खर्च हो। क्योंकि अनेक प्रसिद्ध योग संस्थाएं जो विभिन्न शहरों में नि:शुल्क योग शिविर लगाकर पचासों सालों में वो कार्य नहीं कर पायी, जो बाबा रामदेव ने कुछ ही वर्षो में स:शुल्क योग शिविर लगाकर कर दिखाया।
yoga 2 बात लगभग 1990 की है मैं अपने शहर के निकट एक गुरूकुल में योग की शिक्षा योगाचार्य पूज्य प्रेमपाल जी आर्य के दिशा निर्देंशन में ले रहा था। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समर्पण वास्तव में सराहनीय है। मेरे पूज्य गुरू आचार्यवर धीरेन्द्र ब्रहमचारी के शिष्य हैं, और उनके ही विश्वायतन योग संस्थान दिल्ली से योगाचार्य की डिग्रीधारी हैं।
मैं प्रारम्भ में उनके पास केवल ‘साइनस’ (नाक का एक रोग) के कारण सूत्रनेति सीखने गया था, परन्तु योग में मेरी रूचि देखकर गुरू जी ने मुझे हठयोग के षटसाधन-धोति को छोड़कर-बस्ती- नेति-त्राटक-न्योलि-कपालभाति सीखाना प्रारम्भ कर दिया, क्योकि योगासन का मैं पहले से ही अभ्यासी था, कॉलेज में ‘पॉल्वाल्ट’ और ‘हाईजंप’  का अच्छा खिलाड़ी था अत: ‘फिजिकली’ योग की गूढ़ क्रियाओ का सीखने में मुझे ज्यादा परेशानी नहीं हुई  योग के बारे में उनका ज्ञान गजब का था। वे किसी भी योगासन के बारे में धाराप्रवाह बोल सकते थे। योग का प्रचार-प्रसार वे नि:शुल्क करते थे, यदि मैं उन्हे कुछ देता भी, तो वे उसे लेकर गुरूकुल के चन्दे की रसीद काट देते थे, अपने पास कुछ नहीं रखते थे।
yoga 1 हठयोग के सभी साधनों का अभ्यास चल रहा था जिसमें केवल ‘धोति’ क्रिया सीखना रह गया था, जिसे गुरू जी ने अपने सामने ही कराने की बात कह देते थे। परन्तु मैं जल्द से जल्द इसे सीखना चाहता था। ”पढ़ने में साधारण सी क्रिया ”धोति” जिसमें 4 अंगुल चौड़ा और 2-3 हाथ लम्बा कपड़ा चाहिए, हल्के गुनगुने पानी से उसे निगल ले, फिर बाहर निकाल दें।” ये बात अन्य योगासनों पर भी लागू होती है, पढ़ने में जितने सरल लगते हैं, परन्तु बिना किसी निर्देशन के करने से लाभ के स्थान पर हानि की सम्भावना ज्यादा होती है।
मैं उस प्रात: गुरूकुल जल्दी पहुंच गया था। गुरूजी दैनिक क्रियाओ में लगे थे, मैं अपने साथ मखमल का टुकड़ा ‘धौति’ लेकर गया था। अन्य योगासनों के अभ्यास से निवृत्त हो चुकने के बाद मैंने ‘धौति क्रिया’, बिना गुरू की अनुमति के स्वयं करनी प्रारम्भ कर दी। उबकाई-उल्टी करते-करते उसे निगलते-निगलते लगभग 20-25 मिनट बीत गई। जब मैंने उसे वापस निकालना शुरू किया तो वो नहीं निकली, खींचतान करने से पेट में दर्द सा महसूस हुआ, इतने में गुरू जी आ गये, हाथ में ‘धौति’ का छोर व मेरे चेहरे को देखकर वो वास्तुस्थिति को तुरन्त समझ गये, उन्होने फौरन देशी घी मंगवाया और कटोरे में मुझे पीने के लिए दिया, और ‘धौति’ के हिस्से को अपने हाथ से पकड़ लिया, कुछ ही देर में ‘धौति’ को उन्होने खींच लिया और वह बाहर आ गयी।

yoga 5 उसके बाद गुरू जी ने मुझे समझाया, ”बेटा! ”हठयोग” के 6 साधनों की क्रियाये किसी नट या बाजीगर की कलाओं की तरह हैं ये ‘श्रम साध्य’ ही नहीं ‘समय साध्य’ भी है। योग के सामान्य से दिखने वाले आसन भी व्यक्ति में तेजी से शारीरिक व मानसिक परिवर्तन लाते हैं, अत: इन्हें बिना ‘गुरू’ के नहीं करना चाहिए। अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि उठानी पड सकती है। ये मामूली सी दिखने वाली ‘धौति’ क्रिया ”समय निष्ठ” क्रिया है, यदि ये ‘धौति’ मनुष्य के शरीर में 15-20 मिनट से ज्यादा रह जाये तो ”पाचनतंत्र” इन्हें पचाने में लग जाता है और ये पाचनतंत्र में फंस जाती हैं। घी क्योकि सुपाच्य है और पेट में जाते ही अतिसार (दस्त) की स्थिति उत्पन्न करता है, जब इसे पीया जाता है तो पाचनतंत्र इसे ग्रहण करने के लिए अपना मुंह खोले रखती हैं, उसी समय ‘धौति’ को खींचकर बाहर निकाला जा सकता है।” इतना कहकर गुरू जी चले गये, और मैं भी ‘टॉय़लेट’ की तरफ चल दिया

अंत में एक “दोहे” के साथ गुरू वन्दना करते हुए, मैं अपना ब्लॉग समाप्त करता हूं-
जब मैं था  गुरू  नहीं अब गुरू है मैं  नाय,,
प्रेम गली अति सांकरी ता मै दो ना समाय।

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183 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Fleta के द्वारा
July 11, 2016

That inhi’stgs perfect for what I need. Thanks!

nishamittal के द्वारा
January 1, 2014

उपयोगी आलेख संजय जी

    sanjay kumar garg के द्वारा
    January 3, 2014

    आदरणीय निशा जी, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए सादर धन्यवाद!

    Scout के द्वारा
    July 11, 2016

    Dag nabbit good stuff you whnreersiapppps!

    Kethan के द्वारा
    July 11, 2016

    Anda y que le ondulen a Sanchez-Dragó ( que manía con los apellidos coeomustps)…"juro por mi honor" dice el payo…me dan ganas de reproducir el comentario que te he soltao en el otro post de hace dos días, (el que colgaste sobre éste fantasmón pederasta y el pistolero Marcial Reverte Estefanía, el Harry el sucio de Cartagena…) pero es que era muy histórico-rollero y casi que no.Si dentro del honor entra follarse niñas, y luego ir contándolo como un chulo tabernario…pues oiga casi que se queden con su honor.Un abrazo

sanjay kumar garg के द्वारा
December 31, 2013

समस्त पाठकजनों व् ब्लॉगर्स को अंग्रेजी नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाये!

    Dortha के द्वारा
    July 11, 2016

    Ana I will try to learn from you and have one window open on my screen – I wonder for how long? ;) Yes kids are fintK!tristing and watching the Oscars – I think that is a beautiful combination ;) and I know what you mean about black swan being a little creepy – it has its dark moments – but she’s amazing with so many layers to her character – a must see!

sanjay kumar garg के द्वारा
December 31, 2013

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन! आपको भी अंग्रेजी नववर्ष कि हार्दिक शुभकामनाये!

    Josie के द्वारा
    July 11, 2016

    "This masterful portrait of Regency England blends Jane Au1s;n&#82t7es biting social commentary with ultraviolent depictions of sea monsters biting." -from amazon, haha. sounds hilarious! :)

sadguruji के द्वारा
December 31, 2013

संजयजी,अंग्रेजी नववर्ष आपके लिए और आपके परिवार के लिए मंगलमय हो.

    Dayanara के द्वारा
    July 11, 2016

    I’ve been exploring for a little bit for any hig-lquahity articles or blog posts on this sort of area . Exploring in Yahoo I at last stumbled upon this web site. Reading this info So i am happy to convey that I’ve a very good uncanny feeling I discovered just what I needed. I most certainly will make sure to don’t forget this site and give it a look on a constant basis.

sadguruji के द्वारा
December 30, 2013

बहुत अच्छा लेख.कई लोग टीवी देख के घर में कपालभांति करते हैं और आहार पर कोई कंट्रोल नहीं करते हैं,जिसके फलसवरूप उन्हें गैस्ट्रिक और बुखार पकड़ लेता है.उपयोगी और शिक्षाप्रद लेख.बधाई.

    sanjay kumar garg के द्वारा
    December 30, 2013

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन! आपकी बात बिलकुल ठीक है, लेख पर आने व् कमेंट्स करने के लिए हार्दिक आभार!

ranjanagupta के द्वारा
December 30, 2013

आज कल योग बहुत ज्यादा चर्चित हो चुका है पर सावधानी अपेक्षितहै ,संजय जी ,आपने सही लिखा !साभार !

    sanjay kumar garg के द्वारा
    December 30, 2013

    आदरणीया रंजना जी, सादर नमन! अपने अनमोल विचारों से अवगत करने के लिए सादर आभार!

December 26, 2013

SAHI KAHA SANJAY JI AAPNE .HAM PAISE KO HI TARZEEH DETE HAIN .

    sanjay kumar garg के द्वारा
    December 27, 2013

    आदरणीय शालिनी जी, ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए सादर धन्यवाद!

    Servena के द्वारा
    July 11, 2016

    Tyvärr sÃ¥ är vi inte mÃ¥nga kvinnliga gamers och vi kommer aldrig vara en mÃ¥lgrupp att räkna meÃÃ.„ndd¥ tycker jag att dom borde inte köna tvspel reklam.


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