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धरती की गोद

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कुछ तो अपना अता-पता दे अरी! जिन्दगी!!!

Posted On: 4 Jan, 2014 Others में

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पाठकजनों!! “जिन्दगी” हमें “र्इश्वर” का दिया हुआ एक सुन्दर पुरस्कार है। हर इन्सान अपनी मानसिक स्थिति के अनुसार “जिन्दगी” को भिन्न-भिन्न रूपों में देखता है। मैंने अपने इस ब्लॉग में आपके ज्ञानार्थ कवि-शायरों की ‘कविताओं’ व ‘शेरों’ का संकलन किया है, जो अपने-अपने अन्दाज में “जिन्दगी” की व्याख्या कर रहे हैं। आशा है “ब्लॉगिंग” के क्षेत्र में, मेरा ये नया प्रयोग आपको पसन्द आयेगा!
* एक वाइज (धर्मगुरू) से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो जोश मलिहाबादी ने कहा-
क्या शेख की खुश्क जिन्दगानी गुजरी
बेचारे की इक सब न सुहानी  गुजरी
दोजख के  तख्युल  में  बुढ़ापा  बीता                     (नर्क)
जन्नत की दुआओं में जिन्दगानी गुजरी।

* एक निराशावादी से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो अहकर काशीपुरी ने कहा-
ऐश की छाँव हो या गम की धूप
जिन्दगी को कही पनाह नहीं
एक   वीरान  राह है   दुनिया
जिसमें कोर्इ कयामगाह नहीं।                    (विश्रामग्रह)

flow4
* एक आशावादी से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो एक शायर साहब बोले-
जिन्दगी जिन्दादिली का नाम है
मुर्दा दिल खाक जिया करते हैं।
* एक स्वप्न में खोये हुए से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो चकबस्त साहब बोले-
जिन्दगी और जिन्दगी की यादगार
परदा और परदे पे कुछ परछार्इयाँ।

lower ghajal

* एक आशिक से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो हरि कृष्ण प्रेमी ने कहा-

किसी के प्यार की मदिरा जवानी जिन्दगी की है,
हमेशा प्रेमियों की ऋतु सुहानी जिन्दगी की है,
प्रणय के पंथ पर प्रेमी प्रलय-पर्यन्त चलता है
किसी के प्यार में मरना निशानी जिन्दगी की है।

* एक नाकाम आशिक से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो एक शायर साहब बोले-
खुदा से मांगी थी चार दिन उम्रे-दराज, (चार दिन लम्बी उम्र)
दो हिम्मते-सवाल में गुजरी, दो उम्मीदे-जवाब में।

* एक शहरी से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो बशीर मेरठी बोले-
है अजब शहर की जिन्दगी, न सफर रहा न कयाम है,
कहीं कारोबार सी दोपहर, कही बदमिजाज सी शाम है।

* एक फकीर से पूछा! जिन्दगी क्या है? तो बशीर मेरठी बोले-
मैकदा रात गम का घर निकला,
दिल हवेली तले खंडहर निकला
जिन्दगी एक फकीर की चादर
जब ढके पांव हमने, सर निकला।

surahi
* एक रिन्द (शराबी) से पूछा? तो अनवर साहब ने कहा-
जिन्दगी एक नशे के सिवा कुछ नहीं,
तुमको पीना ना आये तो मैं क्या करूं।
* और अदम साहब ने कहा-
मैं मयकदे की राह से होकर निकल गया,
वर्ना सफर हयात का काफी तवील था।                    (जिदगी) (लम्बा)
* एक तन्हा से पूछा? तो इकबाल सफीपुरी ने कहा-
आरजु भी हसरत भी, दर्द भी मसर्रत भी, (खुशी)
सैंकड़ों हैं हंगामे मगर जिन्दगी तन्हा।
* एक वतनपरस्त से पूछा? जिन्दगी क्या है? तो कान्ता शर्मा जी ने कहा-
सांस की हर सुमन है, वतन के लिए,
जिन्दगी ही हवन है, वतन के लिए
कह गयी फाँसियों में फंसी गर्दनें,
यह हमारा नमन है वतन के लिए।
* एक प्यासे से पूूछा? तो कुंवर बेचैन जी ने कहा-
जन्म से अमर प्यास है जिन्दगी
प्यास की आखिरी सांस है जिन्दगी
मौत ने ही जिसे बस निकाला यहां
उंगलियों में फंसी फाँस है जिन्दगी।

* जिन्दगी को कटु सत्य मानने वाले से पूछा? तो पदमसिंह शर्मा जी ने कहा-
जिन्दगी कटु सत्य है सपना नहीं है
खेल इसकी आग में, तपना नहीं है
कौन देगा साथ इस भूखी धरा पर
जबकि अपना श्वास भी अपना नहीं है।

* जिन्दगी को महबूबा मानने वाले फिराक गोरखपुरी ने कहा-
बहुत पहले से उन कदमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ! जिन्दगी हम दूर से पहचान लेते हैं
तबियत अपनी घबराती है, जब सुनसान रातों में
हम ऐसे में तेरी यादों की, चादर तान लेते हैं।

* जिन्दगी की नश्वरता में विश्वास रखने वाले मीर अनीस ने कहा-
जिन्दगी भी अजब ,सरायफानी देखी
हर चीज यहां की ,आनी जानी देखी
जो आ के ना जाये, वह बुढ़ापा देखा
जो जा के न आये, वो जवानी देखी।

madhush

* अब मैंने जिन्दगी के मायने मधुशाला से पूछे? तो बच्चन साहब ने कहा-
छोटे से जीवन में कितना प्यार करूं, पीलूं हाला,
आने के ही साथ जगत में, कहलायेगा जाने वाला
स्वागत के ही साथ, विदा की होती देखी तैयारी
बन्द लगी, होने खुलते ही, मेरी जीवन मधुशाला।

galib

* जिन्दगी भर ‘गालिब’ साहब को यही ‘गम’ रहा-

उम्र भर ‘गालिब’ यही भूल करता रहा,

धूल चेहरे पे थी, आर्इना साफ करता रहा!

* जिन्दगी को कैद मानने वाले आगा जी ने कहा-

पहरा बिठा दिया है, ये कैदे-हयात ने
साया भी साथ-साथ है, जाऊं जहां कही। (जीवन रूपी कैद)

* जिन्दगी को हादसा मानने वाले असगर गोडवी ने कहा-
चला जाता हूँ हँसता खेलता मौजे-हवादिस से, (दुर्घटनाओं की लहर)
अगर आसानियां हो जिन्दगी दुश्वार हो जाये।
* जिन्दगी के बारे में तपिश साहब ने कहा है-
फिरती है पीछे-पीछे अजल, उफ री जिन्दगी (मौत)
मिलता नहीं है दर्द, दवा की तलाश है।

* अन्त में ‘मैं’ अपने जज्बात नीरज जी के ‘मुक्तक’ से व्यक्त करना चाहता हूँ-
पंच तत्व के सत, रज, तम से बनी जिन्दगी
अर्थ-काम रत, धर्म-मोक्ष से डरी जिन्दगी
आवागमन अव्यक्त अनेक रूप है तेरे,
कुछ तो अपना अता-पता दे अरी जिन्दगी!

पाठकजनों!! आप जिन्दगी को किस रूप मे देखते हैं, अवश्य शेयर करें!

birds ghajal

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171 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
March 22, 2014

to me life is a poetry इतना सुन्दर ब्लॉग जेन कैसे मुझसे छूट गया था बहुत खूब

    sanjay kumar garg के द्वारा
    March 22, 2014

    आदरणीया यमुना जी! सादर नमन! वास्तव में जिंदगी एक “कविता” भी है, जिसे हम गुनगुना सकतें हैं! ब्लॉग को पढ़ने व् कमेंट्स करने के लिए आभार! आदरणीय यमुना जी!

    Cherilynn के द्वारा
    July 11, 2016

    There was a series of books I read as a boy that were about young Scotch-Irish pioneers (although I don’t think the term was used) who wear leather and “linoey-wsolsy” shirts, and they get into battles with Indians or explore places like Kentucky and Tennessee.:) Anyone have the equivalent for us Northern folk?

sadguruji के द्वारा
January 6, 2014

अच्छे लेख के लिए बधाई संजयजी,मेरे विचार से जीवन एक सफ़र है और समय रूपी वाहन पर सवार होकर हमसब लोग यात्रा कर रहे हैं.यात्रा कहाँ से शुरू हुई और कहाँ ख़त्म होगी,यही जानना आध्यात्म है और इसे जानकर सत्य के आलोक में जीवन जीना बड़े सौभाग्य की बात है.

    sanjay kumar garg के द्वारा
    January 6, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन! “वास्तव में जीवन एक सफ़र भी है, जिसमे बस चलते जाना है, बिना रुके, एक अनजान सफ़र की और….” ब्लॉग पर आने के लिए सादर धन्यवाद, सद्गुरु जी!

    Bella के द्वारा
    July 11, 2016

    My family and I are already talking about how to simplify Christmas for next year because of just this. It’s hard to focus quietly on the good when you’re in a holiday frb2sy.n900 &nbzp;| &nesp;

January 6, 2014

बहुत सुन्दर .नव वर्ष २०१४ की हार्दिक शुभकामनायें

    sanjay kumar garg के द्वारा
    January 6, 2014

    आदरणीया शालिनी जी! सादर नमस्कार! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए सादर आभार! आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

harirawat के द्वारा
January 6, 2014

बहुत सुन्दर ! आपने जीवन के हर पहलू पर एक नायाब तोहफा भेंट कर दिया जागरण जंक्शन के पाठकों को ! साधुवाद और नए साल की बधाई ! हरेन्द्र जागते raho

    sanjay kumar garg के द्वारा
    January 6, 2014

    आदरणीय हरेन्द्र जी, सादर नमन! आपको मेरा नया “प्रयोग” पसंद आया, उसके लिए धन्यवाद! आपको भी नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें!

    Lainey के द्वारा
    July 11, 2016

    Absolutely first rate and coetpr-botpomed, gentlemen!

    Kamberley के द्वारा
    July 11, 2016

    Miguel Angel GrandaHola de nuevo. No sé si será el lugar indicado, pero he leído el enlace de &#;8Â02AnatomÃ2­a de la Edición” y me he quedado asombrado. Se ve a la lengua que lo han escrito los de Libranda, porque menudas chorradas dicen. ¿No aprenden de lo que ven, o acaso no quieren darse cuenta del mundo en el que viven? Bueno, allá ellos. Hablan sobre el ebook y lo plantean de un modo absurdo y surrealista. ¿Tan tontos somos que no se pueden dignar en decir las cosas como son y como cualquiera puede ver? En fin…

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 6, 2014

संजय जी! नया साल में नया प्रयोग ! अति सुन्दर ! ” उमर कपूरी गंध बनी कब तन से उड़ जाए , इसी लिए तो घर-घर में बीमाएं होते हैं !!”

    sanjay kumar garg के द्वारा
    January 6, 2014

    आदरणीय विजय गुंजन जी! सादर नमस्कार! आपकी बात एकदम सही है “उमर कपूरी गंध बनी कब तन से उड़ जाए” ब्लॉग पर आने व् सुन्दर कमेंट्स के लिए हार्दिक आभार व् दो लाईने-”यह जीवन किसी का नहीं, आज है, कल रहे ना रहे, प्यार की बात है, मान लो, फिर जुबा, यह कहे ना कहे!”

    Lynn के द्वारा
    July 11, 2016

    Time to face the music armed with this great inmanfotior.

ranjanagupta के द्वारा
January 6, 2014

प्रयोग बहुत अच्छा रहा !ज्ञान वर्धक है !!

    sanjay kumar garg के द्वारा
    January 6, 2014

    आदरणीय रंजना जी, सादर नमन! आपको मेरा “प्रयोग” पसंद आया उसके लिए आभार!

    Anitra के द्वारा
    July 11, 2016

    That’s a crcckerjaak answer to an interesting question

    Buddy के द्वारा
    July 11, 2016

    Yo8#;u217&re right, unless you need this asap, it’s better to wait for the async stuff.Rx is good right now for other things, but I LOVE the new async much better.


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