social issu

धरती की गोद

30 Posts

20366 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5503 postid : 735700

.......बिगरे काम न जो गम खाये!!

  • SocialTwist Tell-a-Friend

“ज्यादा खाये जल्द मरि जाय, सुखी रहे जो थोड़ा खाय। रहे निरोगी जो कम खाये, बिगरे काम न जो गम खाये।” ऐसी अनेक कहावतों से हमें जिन्दगी के विभिन्न पहलुओं का सटीक मार्गदर्शन मिलता है। घर के बुजुर्ग ऐसी अनेक कहावतों से, समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं। कान्वेन्ट विद्यालयों में पढ़कर आयी नयी पीढ़ी इन कहावतों से अनभिज्ञ है, क्योंकि ये हिन्दी में है, हिन्दी में भी देहाती भाषा में, जिसे वे आसानी से नहीं समझ पाते। ये कहावतें, मैं विशेष रूप से नयी पीढ़ी के लिए लाया हूंँ, ताकि वे इन्हें पढ़कर इनकी विश्वसनियता को जांचे और न केवल अपने ज्ञान में वृद्धि करें, साथ ही  ‘हिन्दी’ की महान ‘साहित्यिक विरासत’ पर भी गर्व कर सकें पाठकजनों!! आज मैं आपके सम्मुख रख रहा हूं ‘‘घाघ व भड्डरी की कहावतें‘‘। शुद्ध देहाती हिन्दी भाषा में लिखी गयी इन कहावतों को हम आसानी से कंठस्थ करके अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकते हैं। इस लेख में मैंने केवल “नीति व स्वास्थ्य” संबंधी कहावतों को ही शामिल किया है।

ghagh1

चैते गुड़ बैसाखे तेल, जेठ मेें पंथ आषाढ़ में बेल।
सावन साग न भादों दही, क्वारें दूध न कातिक मही।
मगह न जारा पूष घना, माघेै मिश्री फागुन चना।
घाघ! कहते हैं, चैत (मार्च-अप्रेल) में गुड़, वैशाख (अप्रैल-मई) में तेल, जेठ (मई-जून) में यात्रा, आषाढ़ (जून-जौलाई) में बेल, सावन (जौलाई-अगस्त) में हरे साग, भादों (अगस्त-सितम्बर) में दही, क्वार (सितम्बर-अक्तूबर) में दूध, कार्तिक (अक्तूबर-नवम्बर) में मट्ठा, अगहन (नवम्बर-दिसम्बर) में जीरा, पूस (दिसम्बर-जनवरी) में धनियां, माघ (जनवरी-फरवरी) में मिश्री, फागुन (फरवरी-मार्च) में चने खाना हानिप्रद होता है।

जाको मारा चाहिए बिन मारे बिन घाव।
वाको  यही बताइये घुॅँइया  पूरी  खाव।।
घाघ! कहते हैं, यदि किसी से शत्रुता हो तो उसे अरबी की सब्जी व पूडी खाने की सलाह दो। इसके लगातार सेवन से उसे कब्ज की बीमारी हो जायेगी और वह शीघ्र ही मरने योग्य हो जायेगा।

पहिले जागै पहिले सौवे, जो वह सोचे वही होवै।
घाघ! कहते हैं, रात्रि मे जल्दी सोने से और प्रातःकाल जल्दी उठने से बुध्दि तीव्र होती है। यानि विचार शक्ति बढ़ जाती हैै।

प्रातःकाल खटिया से उठि के पिये तुरन्ते पानी।
वाके घर मा वैद ना आवे बात घाघ के  जानी।।
भड्डरी! लिखते हैं, प्रातः काल उठते ही, जल पीकर शौच जाने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है, उसे डाक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

सावन हरैं भादों चीता, क्वार मास गुड़ खाहू मीता।
कातिक मूली अगहन तेल, पूस में करे दूध सो मेल
माघ मास घी खिचरी खाय, फागुन उठि के प्रातः नहाय।
चैत मास में नीम सेवती, बैसाखहि में खाय बसमती।
जैठ मास जो दिन में सोवे, ताको जुर अषाढ़ में रोवे
भड्डरी! लिखते हैं, सावन में हरै का सेवन, भाद्रपद में चीता का सेवन, क्वार में गुड़, कार्तिक मास में मूली, अगहन में तेल, पूस में दूध, माघ में खिचड़ी, फाल्गुन में प्रातःकाल स्नान, चैत में नीम, वैशाख में चावल खाने और जेठ के महीने में दोपहर में सोने से स्वास्थ्य उत्तम रहता है, उसे ज्वर नहीं आता।

कांटा बुरा करील का, औ बदरी का घाम।
सौत बुरी है चून को, और साझे का काम।।
घाघ! कहते हैं, करील का कांटा, बदली की धूप, सौत चून की भी, और साझे का काम बुरा होता है।

बिन बेैलन खेेती करै, बिन भैयन के रार।
बिन महरारू घर करै, चैदह साख गवांँर।।
भड्डरी! लिखते हैं, जो मनुष्य बिना बैलों के खेती करता है, बिना भाइयों के झगड़ा या कोर्ट कचहरी करता है और बिना स्त्री के गृहस्थी का सुख पाना चाहता है, वह वज्र मूर्ख है।

ताका भैंसा गादरबैल, नारि कुलच्छनि बालक छैल।
इनसे बांचे चातुर लौग, राजहि त्याग करत हं जौग।।
घाघ! लिखते हैं, तिरछी दृष्टि से देखने वाला भैंसा, बैठने वाला बैल, कुलक्षणी स्त्री और विलासी पुत्र दुखदाई हैं। चतुर मनुष्य राज्य त्याग कर सन्यास लेना पसन्द करते हैं, परन्तु इनके साथ रहना पसन्द नहीं करते।

जाकी छाती न एकौ बार, उनसे सब रहियौ हुशियार।
घाघ! कहते हैं, जिस मनुष्य की छाती पर एक भी बाल नहीं हो, उससे सावधान रहना चाहिए। क्योंकि वह कठोर ह्दय, क्रोधी व कपटी हो सकता है। ‘‘मुख-सामुद्रिक‘‘ के ग्रन्थ भी घाघ की उपरोक्त बात की पुष्टि करते हैं।

खेती  पाती  बीनती,  और घोड़े की  तंग।
अपने हाथ संँभारिये, लाख लोग हों संग।।
घाघ! कहते हैं, खेती, प्रार्थना पत्र, तथा घोड़े के तंग को अपने हाथ से ठीक करना चाहिए किसी दूसरे पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

जबहि तबहि डंडै करै, ताल नहाय, ओस में परै।
दैव न मारै आपै मरैं।
भड्डरी! लिखते हैं, जो पुरूष कभी-कभी व्यायाम करता हैं, ताल में स्नान करता हैं और ओस में सोता है, उसे भगवान नहीं मरता, वह तो स्वयं मरने की तैयारी कर रहा है।

विप्र टहलुआ अजा धन और कन्या की बाढि़।
इतने से न धन घटे तो करैं बड़ेन सों रारि।।
घाघ! कहते हैं, ब्र्राह्मण को सेवक रखना, बकरियों का धन, अधिक कन्यायें उत्पन्न होने पर भी, यदि धन न घट सकें तो बड़े लोगों से झगड़ा मोल ले, धन अवश्य घट जायेगा।

औझा कमिया, वैद किसान आडू बैल और खेत मसान।
भड्डरी! लिखते हैं, नौकरी करने वाला औझा, खेती का काम करने वाला वैद्य, बिना बधिया किया हुआ बैल और मरघट के पास का खेत हानिकारक हैै।

ghaagh2

घाघ व भड्डरी की ‘‘कृषि व मौसम संबंधी कहावतें’’ फिर किसी ब्लाॅग में!!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

632 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Wiseman के द्वारा
July 11, 2016

Lil and family, so sorry to read of Franks passing. He was my little league coach and confirmation sponsor. My Dad did a lot to get Frank and Lil elected and re-elected as Sheriff. I’m glad I got to thank him at Ran#2&d8y17;s funeral for all he did for me.

yamunapathak के द्वारा
May 1, 2014

संजय जी यह तो सच में बेहद सुन्दर और संग्रह करने योग्य ब्लॉग है आपका अतिशय धन्यवाद

    sanjay kumar garg के द्वारा
    May 1, 2014

    आदरणीया यमुना जी, सादर नमन! आपको ब्लॉग अच्छा लगा उसके लिए आभार व् धन्यवाद!

    Jody के द्वारा
    July 11, 2016

    a name can always be changed back and mo12#ied&f8id1;last time I changed it was when I got divorced.And as Shakespeare has said, “that which we call a rose but any other name would smell as sweet.”In other words it’s not so much about the name but about how you feel inside.

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
April 30, 2014

bahut hi gyanvardhak post .aabhar

    sanjay kumar garg के द्वारा
    May 1, 2014

    आदरणीय शिखा जी, कमेंट्स करने के लिए आभार!

    Maggie के द्वारा
    July 11, 2016

    Nézd Laura. Egy pillanatig se gondoltam, nem is mondtam, hogy minden egyes mondatomban tényeket közöltem. Abban a sok mindenben, amit leírtam volt tény, és volt vélemény. Igyekszem úgy fogalmazni, hogy egyértelmü legyen, hogy mikor melyikrÅ‘l van szó.Ennek a szossrzálhasÅgatá‘nak viszont semmi értelme, a magam részérÅ‘l a vitát befejeztem, azt írsz, a továbbiakban, amit akarsz.

nishamittal के द्वारा
April 30, 2014

संग्रहणीय आलेख. सटीक कहावतों और लोकोक्तियों को आज की पीढ़ी नहीं जानती

    sanjay kumar garg के द्वारा
    April 30, 2014

    आदरणीया निशा जी! सादर नमन! आप बिलकुल ठीक कह रही हैं, नयी पीढ़ी को दृष्टिगत रखते हुये ही मैंने इस ब्लॉग को लिखा है! कमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

deepak pande के द्वारा
April 27, 2014

आदरणीय संजय जी सादर नमन आप हर बार पुराने ग्रंथों से कुछ न कुछ उपयोगी जानकारी पेश करके हमारा ज्ञानवर्धन करते हैं सादर धन्यवाद

    sanjay kumar garg के द्वारा
    April 29, 2014

    आदरणीय पाण्डेय जी, सादर नमन! मेरा प्रयास रहता है, कि मैं भारतीय लुप्त प्राय ग्रंथों की उपयोगी जानकारी को सबके सम्मुख रखूं! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए सादर आभार दीपक जी!

    Spud के द्वारा
    July 11, 2016

    A bit surispred it seems to simple and yet useful.

sadguruji के द्वारा
April 26, 2014

बचपन से हमलोग सुनते आ रहे है की -सावन साग न भादों दही, क्वारें दूध न कातिक मही.आदरणीय संजयजी ! बहुत ज्ञानवर्धक और संग्रहणीय लेख.आपको बहुत बहुत बधाई.

    sanjay kumar garg के द्वारा
    April 29, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन! ब्लॉग पर आने व् उत्साहवर्धन कमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

    Raynes के द्वारा
    July 11, 2016

    That’s not just the best anserw. It’s the bestest answer!

ranjanagupta के द्वारा
April 25, 2014

भाई संजय जी ! आपका लेख बहुत पुराने समय की याद दिलाता है ,जब हम लोग अपने घरोंमे बचपन मेबड़े बूढो से ये कहावते सुनते थे !ये कहावते देश काल की सीमा से परे है !आज भी इनका महत्व उतना ही है !पर आधुनिकता की दौड़ में हम अपनी विरासत की अवहेलना करने लगे है ! बहुत ही ज्ञानवर्धक उत्तम लेख !सादर !!

    sanjay kumar garg के द्वारा
    April 29, 2014

    आदरणीया रंजना दीदी! सादर नमन! वास्तव में पश्चिम की अंधी दौड़ में हम अपने महान अतीत को भूलते जा रहें हैं! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

jlsingh के द्वारा
April 25, 2014

यह तो संग्रहणीय है श्री संजय गर्ग जी. बहुत अच्छी बाते आपने संग्रह की है

    sanjay kumar garg के द्वारा
    April 26, 2014

    आदरणीय जे एल सर! सादर नमन! आपको संग्रह अच्छा लगा उसके लिए सादर आभार व् धन्यवाद!

    Kaeden के द्वारा
    July 11, 2016

    / I like the worthwhile facts you offer you inside of your content pieces.I will bookmark your web page and verify all over again listed here coy1nsteitln.I&#82s7;m rather confident I will be taught a good deal of new things perfect the following! Decent luck with the future!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 25, 2014

ये कहावतें हर युग में जीवन यापन के लिए उपयोगी हैं संजय जी आपके लेख सदैव ज्ञानवर्धक एवं सार्थक होते हैं ,बहुत उत्तम लेख के लिए हार्दिक बधाई .

    sanjay kumar garg के द्वारा
    April 25, 2014

    आदरणीया निर्मला जी, सादर नमन! आपको आलेख अच्छा लगा उसके लिए आभार! मैं पाठकों को ज्ञानवर्धक व् उपयोगी आलेख ही देना चाहता हूँ, कमेंट्स करने के लिए सादर धन्यवाद! आदरणीया निर्मला जी!


topic of the week



latest from jagran