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धरती की गोद

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जातस्य हि ध्रुवों मृत्युध्र्रुवं.......।।(कहानी)

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पिकनिक मनाने आये कुछ छात्र नदी के बहाव में बह गये थे।  उनमें से कुछ छात्रों के शव मिल गये थे, बाकि छात्रों की खोज चल रही थी। किसी के जीवित रहने की संभावना न्यून थी। शवों को खोेजने के लिए अनेक टीमें लगायी गयी थीं। नदी का जल रोक दिया गया था ताकि शवों को खोजने में परेशानी न हो। खोजते हुए एक टीम ऐसे स्थान पर पहुंची, जहां नदी घने जंगलों के बीच से जा रही थी। जेठ की तेज धूप में ‘दौड़-धूप‘ करती टीम जंगल में कुछ देर विश्राम के लिए चली गई। तभी उन्होेंने देखा एक युवक पेड़ों की छाॅव में, एक चट्टान पर ध्यानमग्न है। जिज्ञासावश पास जाकर देखा, तो वो युवक लापता छात्रों में से एक था, जो इस समय केवल लंगोटी बांँधे हुए ध्यानावस्थित था।
अरे ये तो ‘सौरभ‘ नाम का छात्र है!-टीम का मुखिया, बहुत सारे फोटो में से एक फोटो से उसका चेहरा मिलाते हुआ बोला।
सभी तेजी से उसके पास पहुँंचे, और उसे झिझोड़ते हुए बोले, सौरभ! तुम जीवित हो? तुम यहां क्या कर रहे हो?
मैं सौरभ नहीं हूँ! ‘छात्र‘ ने अपनी आंखें खोलते हुए कहा।
आप यहां से जाइये, ये जंगल है, यहां जंगली जानवर हैं! छात्र ने कहा, और आंखें मूंदकर पुनः ध्यानमग्न हो गया।
खोजी टीम ने तुरन्त इसकी सूचना अपने वायरलैस से कंट्रोल रूम को दी। जहां पर अनेक छात्रों के परिजनों के साथ सौरभ के परिजन भी किसी बुरे/अच्छे समाचार की प्रतीक्षा में थे।
कुछ ही घंटों में सौरभ के माता-पिता व डाक्टरों की टीम वहां पहुंच गई।
सौरभ की माता ‘छात्र‘ को देखते ही उससे चिपटकर जोर-जोर से रोने लगी।
बेटा! सोनू! तुम ठीक हो ना? ये क्या भेष बना लिया है, तुमने?
मैं तुम्हारा बेटा नहीं हूँ! युवक ने अपनी आंँखें खोलते हुए कहा!
तुम्हारी आवाज को क्या हो गया है सोनू? ये कैसे बदल गई? पापा! आपको नहीं डाटेगें, आप हमारे साथ चलो! मम्मी ने ‘‘सौरभ‘‘ के चेहरे पर प्यार से हाथ फिराते हुए कहा।
हांss बेटा!! इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं थी, ये एक दुर्घटना मात्र थी! पिता ने अपने आँंसू पूछते हुए कहा!
परन्तु माता! मैं तुम्हारा पुत्र नहीं हूंँ, तुम्हारा पुत्र तो मर चुका है! मैं तो एक ‘योगी‘ हूँ, मैंने तुम्हारे मृत-पु़त्र के शरीर में ‘परकाया प्रवेश‘ द्वारा अपनी ‘आत्मा‘ का प्रवेश करा दिया है! युवक ने गंभीर स्वर में कहा।
वहां उपस्थित सभी के चेहरे पर अविश्वास के भाव थे, सौरभ की माता उसे चिपट कर जोर-जोर से विलाप करने लगी।

नहींऽऽ बेटा! सोनू! ऐसा मत कहो! तुम हमारे साथ चलो, सब ठीक हो जायेगा! मां ने सिसकते हुए उससे कहा!
माता! मेरा विश्वास करो! मैं एक योगी हूँ, मेरी आयु सौ वर्ष से भी ज्यादा है, मेरा शरीर ‘कृशकाय’ हो चुका था, मैं काफी दिनों से एक युवा मृत शरीर की तलाश में था। कल मुझे नदी में बहते हुए तीन मृत शरीर मिले, दो शव काफी क्षत-विक्षत हो चुके थे, केवल इसी युवक का शरीर अच्छी स्थिति में था। अतः इस युवक के शरीर में मैंने योग क्रिया द्वारा अपनी आत्मा का प्रवेश करा दिया, और अपने ‘कृशकाय’ शरीर का अपने हाथों से ही अंतिम संस्कार कर दिया। ‘योगी-युवक‘ ने कुछ दूरी पर उठते हुये धुएं की ओर संकेत करते हुए कहा।
नहीं!! तुम मेरे सोनू ही हो! सौरभ की माता उससे चिपटते हुए, रोती हुई बोली।
दो शव कहां है? सौरभ के दादा जी ने उस ‘योगी-युवक‘ से पूछा।
वो मेरी कुटिया के पीछे रखे हैं, अभी मैंने उनका दाहसंस्कार नहीं किया है! ‘योगी-युवक‘ ने उत्तर दिया।
टीम तेजी से वहां पहुंची, देखा वास्तव में दो युवकों के शव, वहां घास से ढके रखे है, वे नदी में बहने वाले छात्रों के ही थे।
हम कैसे विश्वास करें, आप जो कह रहे, वो सच है? सौरभ के दादा जी ने विनम्र स्वर में कहा।
क्या आप हमें उन दो मृत शरीरों में से किसी एक शरीर में अपनी आत्मा का प्रवेश करा कर दिखा सकते हैं? दादा जी गंभीर स्वर में बोले।
पुत्र! वो शरीर काफी क्षतिग्रस्त हैं, उसमें मेरी आत्मा ज्यादा समय तक नहीं रह सकती, तुम्हें विश्वास दिलाने के लिए मैं ये भी करने के लिए तैयार हूंँ। ‘योगी-युवक‘ ने कहा।
‘योगी-युवक‘ ने गहरीे सांस खींची व अपने आँंखे मूंद ली। उसका शरीर निढाल होकर पत्थर पर लुढक गया, डाक्टर ने उसके शरीर का निरीक्षण किया।
अरे!! शरीर की धड़कने तो बन्द हो गयी हैं, शरीर की गरमाई भी समाप्त हो गयी है, मैं दावे से कह सकता हूँ कि ये अब जीवित नहीं है! डाक्टर ने अपना स्टेथोस्कोप कान से निकालते हुए कहा। सौरभ की माता शव से चिपटकर जोर-जोर से रोने लगी। सभी शव के चारों ओर खड़े थे।
पुत्र!!! देखो? एक परिचित सी तेज आवाज उनके पीछे से आयी।
पीछे देखते ही उनकी चीखें निकल गई, दो मैं से एक क्षत-विक्षत शव खड़ा था!
अब तो विश्वास है पुत्र! ‘योगी‘ की आवाज अब उस शव में से आ रही थी। यह कहकर वह शव जमीन पर लुढ़क गया। सभी आश्चर्य से उसे देख रहे थे।
सौरभ के शरीर में चेतना लौटने लगी, शरीर धड़कने लगा। शरीर पर हाथ रखे बैठा डाक्टर डर कर उछल पड़ा।
हे! मेरे ईश्वर! ये सब क्या है!! डाक्टर घबराकर पीछे हटता हुआ बोला।
निढाल पड़े सौरभ के शरीर में पुनः चेतना लौट आयी और वो इस प्रकार उठ कर बैठ गया, मानो किसी नींद से जागा हो।
बेटा!! तुम योगी हो या कुछ और तुम मेरे पुत्र सौरभ ही हो। तुम्हे हमारे साथ चलना ही होगा! सौरभ की मां ने सुबकते हुए, ‘योगी‘ का हाथ पकड कर खींचते हुए कहा।
मां! पिछले सौ वर्षो से दुर्गम स्थान व बियावान जंगल मेरी शरणस्थली रहे हैं, अपने माता-पिता, भाई-बन्धुओं को भी मैंने सौ वर्ष पहले त्याग दिया था, अब तो सारा संसार ही मेरा परिवार है। मां! मैं तेरे साथ कैसे जा सकता हूंँ? योगी कुछ देर शान्त रहे फिर बोले-परन्तु मां! मैं तेरा ऋणी हूँ, क्योंकि तेरे द्वारा प्रसूत व पोषित शरीर में मेरी आत्मा स्थिति है, अतः आज से तू मेरी माता हुई! यह कहकर योगी ने सौरभ के माता-पिता के सामने साष्टांग प्रणाम किया। सुबकते हुए माता-पिता के चरणों में ही योगी कुछ देर शान्त बैठे रहे, और फिर बोले!
मां!! मैं तुझे आज दो वचन देता हूंँ, पहला ये-जब भी और जहां भी, तू अपने पुत्र को याद करेगी, मैं सशरीर तेरे सामने उपस्थित हो जाऊंगा। दूसरा ये है कि तेरा मृत पुत्र ‘सौरभ‘ तेरा ‘नाती‘ बनकर, तेरी पुत्री के गर्भ से इस संसार में पुनः जन्म लेगा-‘योगी‘ के चेहरे पर गंभीर भाव थे। सभी की आंखों से अश्रुधारा बह रही थी।
अंधेरा होने वाला है, अब आप इस जंगल से जाइये! कहकर ‘योगी‘ पुनः उसी चट्टान पर बैठकर ध्यान मग्न हो गये।
खोजी दल ने दोनों शवों को स्ट्रेचर पर लाद लिया। सौरभ के पिता और दादा, सौरभ की माता को वहां से ले जाने लगे।
‘योगी‘ के मुख से, ‘अस्फुट‘ स्वर में ‘‘श्रीमद्भागवत‘‘ का श्लोक ‘प्रस्फुटित‘ होने लगा-

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युध्र्रुवं जन्म मृतस्य च।
तस्माद् परिहार्येऽर्थे न त्वं शोचि तुमर्हसि।।
अर्थात जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात पुर्नजन्म भी निश्चित है। अतः अपने अपरिहार्य कर्त्तव्य पालन में तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।
(कहानी के पात्र, स्थान, घटनाक्रम आदि काल्पनिक हैं)

-संजय कुमार गर्ग

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1846 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

eyeglasses online in india के द्वारा
November 16, 2017

Hi, Neat article eyeglasses online in india. Likely to situation using your web site with industry, would check that? For example still is the marketplace innovator and a superior aspect to other people may omit your own excellent crafting because of this problem.

Kayli के द्वारा
July 11, 2016

You have the monopoly on useful inaonmftior-aren’t monopolies illegal? ;)

harirawat के द्वारा
July 17, 2014

सचमुच कहानी की शब्द शैली से गोता लगाते जा रहा था पता ही नहीं लगा की किनारा कब आ गया ! काल्पनिक है पर वास्तविकता के धरातल पर सही उतरी है ! योगियों के लिए यह संभव है ! इससे मिलती जुलती कहानी मैं पहले भी किसी मैगजीन मे पढ़ चुका हूँ ! एक नई तरह की कहानी पढ़ने दो मिली, साधुबाद ! हरेन्द्र जागते रो

    sanjay kumar garg के द्वारा
    July 18, 2014

    आदरणीय रावत जी, सादर नमन! मेरी कहानी मौलिक है, किसी कहानी की नक़ल नहीं है, आप को कहानी अच्छी लगी उसके लिए सादर आभार!

    Cornelia के द्वारा
    July 11, 2016

    It’s imrtapeive that more people make this exact point.

    Jimbo के द्वारा
    July 11, 2016

    Usando Mozilla Firefox 3.0.1 no LinuxFelipe, não acho que seja questão de sorte, mas sim de prioridade. Houve um tempo em que estudar pra mim era irrelevante, o que interessava era conseguir mulher. Prb.oidadesrAiraço

Santlal Karun के द्वारा
June 25, 2014

आदरणीय संजय जी, हिमाचल प्रदेश के मंडी में व्यास नदी में बहे 25 लोगों की मृत्यु के समाचारों की प्रसार-दीर्घा में पौराणिक उपपत्ति को विस्तार देती इस कहानी का पाठ इसके पाठकों के लिए अधिक ग्राह्य और सार्थक हो गया है | वैसे भी पूरी कहानी पठनीय जिज्ञासा क्षीण नहीं होने देती | कथ्य और शिल्प का ताना-बाना कहानी के अनुरूप तथा स्तरीय है | पौराणिक सन्दर्भ से अनुस्यूत इसके सन्देश में योग-शक्ति की विश्वसनीय प्रतिष्ठापना का मनोवैज्ञानिक तथा कथात्मक प्रयास परिलक्षित होता है | … इस मौलिक व श्रेष्ठ कथा-कृति के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 26, 2014

    आदरणीय संतलाल जी, सादर नमन! व्यास नदी की दुर्घटना ने जनमानस को हिला कर रख दिया था, उस पर जारी वीडियो ने आग में घी का काम किया, साथ ही ये वीडियो हमारे समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता का भी घोतक है, कोई मर रहा है, कोई मरते हुए की वीडियो ग्राफी कर रहा है! अरे कुछ नहीं कर सकते ईश्वर से प्रार्थना तो कर ही सकते हो? आदरणीय संतलाल जी! समाज की किसी घटना-दुर्घटना को हर संवेदनशील मस्तिष्क अपनी-अपनी मानसिक स्थिति के अनुसार व्यक्त करता है, कोई संवेदना व्यक्त करता है, कोई समाज को उन दुर्घटनाओं से बचने के उपाय सुझाता है, वहीं लेखक एक रचना रचता है! ये मेरी कथा इस भयानक दुर्घटना पर मेरी मानसिक स्थिति का परिचायक है! आपका प्रेरणास्पद कमेंट्स निश्चित ही मेरा उत्साह वर्धन करेगा और मुझे अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करेगा! धन्यवाद! सर!

    Micheal के द्वारा
    July 11, 2016

    Your post captures the issue pelrectfy!

    Sugar के द्वारा
    July 11, 2016

    Dude, right on there brrtoeh.

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 25, 2014

    आदरणीय योगी जी, सादर नमन! कहानी के बारे में आपका कमेंट्स उत्साह वर्धक है! योगी जी! आपके सभी कमेंट्स मेरा सटीक मार्गदर्शन करते हैं! ब्लॉग पर आने व् कमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

    Suzy के द्वारा
    July 11, 2016

    Just do me a favor and keep writing such trnnhcaet analyses, OK?

    Arjay के द्वारा
    July 11, 2016

    That was a paste actually as you can see I have no problem showing who I am. I also just tweeted you the sccreenshot. Had I had this before it also would have went up in the post with Ki&t7nes#821i;s screenshots.

ranjanagupta के द्वारा
June 23, 2014

बहुत ह्रदय  स्पर्शी रचना भाई संजय जी ! बहुत कुछ सत्य सी लगी यह कहा नी ! पहले ऐसा लगा कि कोई घटना आप अपनी जानकारी की लिख रहे है ,पर बाद में बोध हुआ कि इस कथा के बहाने आप मॄत्यु और पुनर्जन्म ,परकाया प्रवेश की यौगिक क्रिया का सत्य समझाना चाह रहे है !सादर !!बधाई

    Gracelynn के द्वारा
    July 11, 2016

    Me gustan mucho los espárragos. Mejor naturales que de lata, como todas las verduras. A la plancha están buenísimos… ahora… que me da un poco de mal rollo la expresión que usas: &#t#s0;erec8o2&28221;. No sé por qué :-P Un saludo, Bea :-)

ranjanagupta के द्वारा
June 23, 2014

बहुत ह्रदय  स्पर्शी रचना भाई संजय जी !भुत कुछ सत्य सी लगी यह कहा नी ! पहले ऐसा लगा कि कोई घटना आप अपनी जानकारी की लिख रहे है ,पर बाद में बोध हुआ कि इस कथा के बहाने आप मॄत्यु और पुनर्जन्म ,परकाया प्रवेश की यौगिक क्रिया का सत्य समझाना चाह रहे है !सादर !!बधाई

    Buckie के द्वारा
    July 11, 2016

    When you think about it, that’s got to be the right ansrew.

    Jazlyn के द्वारा
    July 11, 2016

    Thanks for spending time on the computer (wrigint) so others don’t have to.

ranjanagupta के द्वारा
June 23, 2014

बहुत ह्रदय  स्पर्शी रचना भाई संजय जी !भुत कुछ सत्य सी लगी यह कहा नी ! पहले ऐसा लगा कि कोई घटना आप अपनी जानकारी की लिख रहे है ,पर बाद में बोध हुआ कि इस कथा के बहाने आप मॄत्यु और पुनर्जन्म ,परकाया प्रवेश की यौगिक क्रिया का सत्य समझाना चाह रहे है !सादर !!बधाई !!

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 24, 2014

    आदरणीया रंजना दीदी! सादर नमन! आप काफी दिनों से नेट पर नहीं थी, आशा करता हूँ आप स्वस्थ और कुशलता पूर्वक होंगी? आप तो स्वम बहुत अच्छी कहानी लिखती है, जो कई दिनों मन-मस्तिष्क पर छाई रहती है! आपको कहानी अच्छी लगी उसके लिए आभार व् धन्यवाद!

Shobha के द्वारा
June 23, 2014

संजय जी आपकी कहानी पढ़ अजीब बोध हूआ आपने लिखा है सब कुछ काल्पनिक है परन्तु यही जीवन का सत्य भी है विचित्र कल्पना बहूत सुन्दर रचना शोभा

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 23, 2014

    आदरणीया शोभा जी, सादर नमन! वास्तविकता ये है कि हर “कहानी-कथा” किसी न किसी के जीवन से कम या ज्यादा अवश्य संबंधित होती है, क्योंकि लेखक जितना “मानसिक-गहनता” में उतरता जाता है वो भविष्य से उतना ही “तदात्म” स्थापित कर लेता हैं! मेरी ये कथा भी एक अजीब संयोग है, इसे मैंने कैसे लिखा ये मुझे भी नहीं पता! आदरणीया शोभा जी! मैं चाहता हूँ, ये किसी के जीवन से सम्बंधित ना हो, ये केवल एक कहानी मात्र हो! कोई अपने बच्चों को इस प्रकार ना खोये! ब्लॉग पर आने व् एक भाव भरा कमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

    Rennifer के द्वारा
    July 11, 2016

    Articles like these put the consumer in the driver seat-very imptrtano.

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 20, 2014

अर्थात जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात पुर्नजन्म भी निश्चित है। अतः अपने अपरिहार्य कर्त्तव्य पालन में तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। एक रोचक लघु कथा के जरिये आपने ये समझा दिया कि जीवन क्षण भंगुर है,और जिसका जन्म हुआ है वो मृत्यु को प्राप्त होगा और पुनर्जन्म लेगा ,गीता का सार भी यही है .बहुत उत्कृष्ट लघु कथा आदरणीय संजयजी ,बधाई .

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 23, 2014

    आदरणीया निर्मला जी, सादर नमन! आपको कहानी अच्छी लगी उसके लिए आभार व् कमेंट्स करने के लिए सादर धन्यवाद!

    Destiny के द्वारा
    July 11, 2016

    I have to tell you that although I am getting a little slack at work but I ALWAYS do this to my apples now. I love eating it in pieces and I hate brining a knife to school. It ha&s#n39;t worked as well for my 7yr old bc he is too picky about the brown but it has been AWESOME for me.

    Ellie के द्वारा
    July 11, 2016

    YAY!!!! Congrats to you and also congrats on getting your voice heard. I think that writing things like that will help people who are not sinlgutionary or spinsterlicious to start thinking about being single in a different way. And that will help single people feel less like &#81&0;misfits2#8222;. This is fantastic news! Great job!

jlsingh के द्वारा
June 19, 2014

आदरणीय श्री संजय गर्ग जी, आपने बहुत ही खूबसूरती और रोचक तरीके से परकाया प्रवेश और “जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात पुर्नजन्म भी निश्चित है। अतः अपने अपरिहार्य कर्त्तव्य पालन में तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।” समझा दिया …बेहतरीन पोस्ट के लिय आपको बधाई!

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 20, 2014

    आदरणीय जे एल सर, सादर नमन! आपको कहानी अच्छी लगी उसके लिए धन्यवाद व् कमेंट्स करने के लिए सादर आभार!

    Joan के द्वारा
    July 11, 2016

    Een beste wesdtrijd. Laat het een flinke opsteker zijn voor de jongens, dat je ook met een flinke dosis werklust de hogere teams kan verslaan ondanks dat je zelf lang niet compleet bent.

जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात पुर्नजन्म भी निश्चित है। अतः अपने अपरिहार्य कर्त्तव्य पालन में तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।जीवन के सत्य को दर्शाती एक बहुत ही सुंदर कथा..आभार आदरणीय संजय जी सादर..

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 20, 2014

    आदरणीया शिल्पा जी, सादर नमन! कहानी को पढ़ने व् कमेंट्स करने के लिए सादर आभार व् धन्यवाद!

sadguruji के द्वारा
June 19, 2014

आदरणीय संजय जी ! इस आध्यात्मिक स्वरुप वाली कहानी के लिए मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये ! परकाया प्रवेश विद्या का बहुत सुन्दर ढंग से चित्रण है ! कहानी बहुत रोचक लगी ! हाँ..क्षत-विक्षत शव में परकाया प्रवेश वाली बात अतिशय कल्पनिक लगी ! फिर भी बहुत रोचक और शिक्षाप्रद !

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 19, 2014

    आदरणीय सद्गुरू जी, सादर नमन! ब्लॉग पर कमेंट्स करने के लिए सादर धन्यवाद! सद्गुरू जी, “क्षत-विक्षत” शव में परकाया प्रवेश “योगी” केवल एक चैलेंज के रूप में करता है, इसलिए उसमे योगी चंद सेकेंड ही रह पाया था! “क्षत-विक्षत” शव में आत्मा प्रवेश नहीं कर सकती ! इसलिए मैंने इस कहानी में उन्हें चंद सेकेण्ड ही रखा! फिर भी आपके मार्गदर्शन का में अपनी अन्य कथाओं में ध्यान रखूँगा!

    Dahrann के द्वारा
    July 11, 2016

    Superior thinking derstonmated above. Thanks!

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
June 19, 2014

adbhut

    sanjay kumar garg के द्वारा
    June 19, 2014

    धन्यवाद! आदरणीया शिखा जी!!

    Lavar के द्वारा
    July 11, 2016

    This piece was a liacfjeket that saved me from drowning.


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